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सीकर में बड़ा फर्जीवाड़ा! कोमा में रहे अधिकारी के नाम से मुहर लगाकर बनाया इनकम सर्टिफिकेट

राजस्थान: के Sikar जिले में सरकारी दस्तावेजों से जुड़ा एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक ई-मित्र संचालक पर आरोप है कि उसने फर्जी हस्ताक्षर और अवैध मुहर का इस्तेमाल कर एक व्यक्ति का इनकम सर्टिफिकेट तैयार कर दिया।

इस मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। यह मामला सामने आने के बाद सरकारी दस्तावेजों की सत्यता और ई-मित्र केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।


ई-मित्र संचालक पर लगा गंभीर आरोप

मामला जिले की Kudan Gram Panchayat का है। यहां के एक ई-मित्र संचालक अशोक कुमार पर फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर इनकम सर्टिफिकेट बनाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायत के अनुसार अशोक कुमार ‘सृष्टि ई-मित्र’ नाम से केंद्र संचालित करता है। आरोप है कि उसने गांव के ही ओमप्रकाश नामक व्यक्ति का इनकम सर्टिफिकेट तैयार किया और उस पर ग्राम पंचायत की मुहर तथा हस्ताक्षर भी लगा दिए।

हालांकि जांच में सामने आया कि दस्तावेज पर लगाए गए हस्ताक्षर और मुहर असली नहीं बल्कि फर्जी थे।


प्रशासक के बजाय सरपंच की पुरानी मुहर लगाई

रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत में वर्तमान में रामप्यारी देवी प्रशासक (सरपंच) के पद पर कार्यरत हैं।

6 अक्टूबर 2025 के बाद राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार सरपंचों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद से केवल ‘प्रशासक’ की मुहर ही वैध मानी जाती है।

लेकिन आरोप है कि ई-मित्र संचालक ने इनकम सर्टिफिकेट पर पुरानी और अवैध ‘सरपंच’ वाली मुहर का इस्तेमाल किया और उस पर फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए।


रिटायर्ड प्रिंसिपल के नाम से लगाई मुहर

मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोप है कि दस्तावेजों को प्रमाणित करने के लिए आरोपी ने एक राजपत्रित अधिकारी की मुहर का भी इस्तेमाल किया।

यह मुहर मदन लाल के नाम की बताई जा रही है, जो एक रिटायर्ड लेक्चरर और बाद में स्कूल प्रिंसिपल रहे हैं।

बताया गया कि मदन लाल जनवरी 2025 में प्रमोट होकर प्रिंसिपल बने थे और डीडवाना में कार्यरत थे।


लंबे समय तक कोमा में रहे अधिकारी

मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि जिन अधिकारी के नाम से मुहर लगाई गई, वे लंबे समय तक कोमा में रहे थे।

जानकारी के अनुसार मदन लाल मई 2024 में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसके बाद वे काफी समय तक कोमा में रहे।

वर्तमान में भी उनका इलाज चल रहा है और वे 28 फरवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

ऐसे में उनके नाम से मुहर और दस्तावेजों का उपयोग किया जाना गंभीर फर्जीवाड़ा माना जा रहा है।


ऐसे हुआ पूरे मामले का खुलासा

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 8 दिसंबर 2025 को ग्राम विकास अधिकारी वीरेंद्र तंवर के पास जन आधार से जुड़े दस्तावेज सत्यापन के लिए पहुंचे।

जब उन्होंने दस्तावेजों की जांच की तो उन्हें मुहर और हस्ताक्षर पर संदेह हुआ।

इसके बाद उन्होंने दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया, जिसमें पता चला कि सरपंच और राजपत्रित अधिकारी दोनों के हस्ताक्षर फर्जी हैं।


पुलिस ने दर्ज किया मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत प्रशासन ने Dadiya Police Station में लिखित शिकायत दी।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने ई-मित्र संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस तरह के और कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं।


सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी प्रमाण-पत्रों की सुरक्षा और सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से बड़ी संख्या में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में यदि कोई संचालक इस तरह फर्जीवाड़ा करता है तो इससे आम लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है।


निष्कर्ष:

सीकर में सामने आया यह मामला सरकारी दस्तावेजों से जुड़े फर्जीवाड़े की गंभीरता को दर्शाता है। एक ई-मित्र संचालक द्वारा फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर इनकम सर्टिफिकेट बनाने का आरोप प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और उम्मीद है कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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