जयपुर: राजस्थान की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष Madan Rathore ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं Ashok Gehlot और Sachin Pilot पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच दिखने वाली नजदीकियों को “सिर्फ दिखावा” करार देते हुए कहा कि इनके बीच की दरारें फोटो खिंचवाने से नहीं भर सकतीं।
गुरुवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मदन राठौड़ ने कहा, “ये दोनों कभी साथ हो ही नहीं सकते। ये साथ होने का नाटक करते हैं। सचिन पायलट जिंदगी भर नहीं भूल सकते कि अशोक गहलोत ने उन्हें ‘नाकारा, निकम्मा और मक्कार’ कहा था।”
दरअसल, यह बयान उस घटना के बाद आया है, जब दिल्ली में आयोजित एक बैठक के दौरान अशोक गहलोत और सचिन पायलट साथ नजर आए थे। इंदिरा भवन में ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल की बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से मुलाकात की और मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाईं।
इस दौरान गहलोत ने मजाकिया अंदाज में पत्रकारों से कहा था, “फोटो खींच लो, फिर कहोगे बनती नहीं है।” इस पर सचिन पायलट ने भी हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी थी।
इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन राठौड़ ने कहा, “जिसे यह साबित करने के लिए फोटो खिंचवानी पड़े कि वे साथ हैं, उससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि उनके बीच कितना गहरा मतभेद है।”
राजस्थान की राजनीति में गहलोत और पायलट के बीच मतभेद कोई नया मुद्दा नहीं है। 2020 के राजनीतिक संकट के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। उस समय गहलोत ने पायलट को “नाकारा और निकम्मा” कहा था, जो आज भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
राठौड़ ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ऐसे शब्दों को कोई भी नेता आसानी से नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा, “राजनीति में विश्वास सबसे बड़ी चीज होती है, और जहां विश्वास ही नहीं है, वहां गठजोड़ सिर्फ दिखावा होता है।”
मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन वर्गों को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती रही है।
उन्होंने अशोक गहलोत के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा, “गहलोत खुद कह रहे हैं कि राहुल गांधी पहली बार एससी-एसटी और ओबीसी के बारे में बोले हैं। इसका मतलब है कि अब तक कांग्रेस ने इन वर्गों के लिए कुछ नहीं किया।”
राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्षों से इन वर्गों को सिर्फ चुनावी फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल करती आई है, जबकि बीजेपी ने उनके विकास के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस मुद्दे को आगामी चुनावों में कांग्रेस की अंदरूनी कलह के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है। गहलोत और पायलट के बीच संबंधों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं, और बीजेपी इसे लगातार मुद्दा बनाती रही है।
हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाने की कोशिश लगातार जारी है।
राजस्थान की राजनीति में यह बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है। जहां बीजेपी कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को उजागर करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस इसे नजरअंदाज कर अपनी एकता का संदेश देने की कोशिश कर रही है।
मदन राठौड़ के बयान ने एक बार फिर गहलोत-पायलट विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। भले ही दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर साथ नजर आ रहे हों, लेकिन विपक्ष इसे “सिर्फ दिखावा” बताकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से कितना असर डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
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