जयपुर: में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को लेकर बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। अब शहर के लोग अपने एरिया के बाहर जाकर लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे। परिवहन विभाग ने ‘पिन कोड लॉक सिस्टम’ लागू कर दिया है, जिसके तहत हर आवेदक को उसी RTO कार्यालय में आवेदन करना होगा, जो उसके क्षेत्र के पिन कोड से जुड़ा होगा।
यह फैसला उस समय लिया गया, जब विभाग के सामने यह सामने आया कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग दूसरे RTO ऑफिस में जाकर लाइसेंस बनवा रहे थे। वजह साफ थी—जहां टेस्ट सख्त था, वहां से बचने के लिए लोग आसान रास्ता तलाश रहे थे।
जयपुर के जगतपुरा स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर नियमों के अनुसार सख्त जांच हो रही थी। यहां सेंसर बेस्ड सिस्टम से ड्राइविंग स्किल की जांच होती है, जिसमें गलती की गुंजाइश कम होती है।
लेकिन पिछले दो महीनों के आंकड़ों ने विभाग को चौंका दिया।
इस बड़े अंतर ने साफ संकेत दिया कि लोग सख्ती से बचने के लिए दूसरे क्षेत्रों में आवेदन कर रहे थे।
नई व्यवस्था के तहत:
इसका सीधा मतलब है—अब ‘शॉर्टकट’ खत्म।
परिवहन विभाग का मानना है कि यह कदम दलालों और फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवाने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाएगा।
पहले कई जगहों पर बिना सही टेस्ट के लाइसेंस बन जाने की शिकायतें आती थीं। कुछ लोग पैसे देकर या जान-पहचान के जरिए दूसरे RTO से लाइसेंस बनवा लेते थे।
अब पिन कोड लॉक होने के बाद:
यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
अब केवल वही लोग लाइसेंस पा सकेंगे, जो वास्तव में ड्राइविंग टेस्ट पास करेंगे। इससे:
अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं, तो:
अब पुराने तरीके—जैसे दूसरे जिले या ऑफिस में जाकर आवेदन करना—काम नहीं करेंगे।
RTO प्रथम के अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव लंबे समय से जरूरी था। उन्होंने बताया कि पिन कोड लॉक से सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगा।
साथ ही, परिवहन आयुक्त को भेजे गए प्रस्ताव के बाद इसे पूरे सिस्टम में लागू किया गया है, जिससे सभी आवेदकों के लिए एक समान नियम सुनिश्चित हो सके।
जयपुर में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए पिन कोड लॉक सिस्टम बड़ा कदम है। अब ‘जुगाड़’ और ‘सेटिंग’ के जरिए लाइसेंस बनवाना मुश्किल हो जाएगा। इससे न सिर्फ सिस्टम में सुधार होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा भी मजबूत होगी।
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