राजस्थान: के रींगस में इन दिनों आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यहां स्थित भैरूं बाबा मंदिर में चल रहे 10 दिवसीय मेले ने रविवार को चरम पर पहुंचते हुए एक नया रिकॉर्ड बना दिया। वैसाख माह के इस विशेष रविवार को करीब 2 लाख श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
सुबह से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंचे, जिनमें परिवारों, नवविवाहित जोड़ों और छोटे बच्चों के साथ आए श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही। हर कोई अपने आराध्य के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगने के लिए उत्साहित नजर आया।
इस मेले की सबसे खास बात इसका पारंपरिक और धार्मिक महत्व है। भैरूं बाबा का यह मेला हर साल वैसाख माह में आयोजित किया जाता है और इसमें ‘छोटा मेला’ और ‘बड़ा मेला’ दोनों का विशेष महत्व होता है। इस बार का बड़ा मेला रविवार को पड़ा, जिसके कारण रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली।
मंदिर परिसर को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया है। बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की सजावट और धार्मिक आयोजनों ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया।
मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-जोल का भी प्रतीक बन गया है। यहां छोटे-बड़े दुकानदार, झूले, खानपान की स्टॉल और लोक कला से जुड़े कार्यक्रम भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इस तरह यह मेला एक बड़े उत्सव का रूप ले चुका है।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ आरएसी के जवानों की भी तैनाती की गई है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मेला समिति के अनुसार, यह आयोजन पूर्णिमा तक जारी रहेगा और अगले चार दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा और ट्रैफिक व्यवस्था को भी मजबूत किया है।
इस मंदिर की खासियत सिर्फ मेला ही नहीं, बल्कि इसका ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी है। लगभग 700 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भैरव बाबा को भगवान शिव का रुद्र अवतार माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा के पांचवें मुख द्वारा शिव की निंदा किए जाने पर भैरव बाबा ने उस मुख का संहार किया था।
इस घटना के बाद उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा, जिसके प्रायश्चित के लिए उन्होंने तीनों लोकों की यात्रा की। माना जाता है कि यह यात्रा रींगस से ही शुरू हुई थी। यही कारण है कि इस स्थान को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
मंदिर में पिछले 14 पीढ़ियों से पूजा-अर्चना कर रहे पुजारी परिवार भी इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। उनके अनुसार, यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जिससे इस स्थल की आस्था और भी गहरी हो जाती है।
रींगस का भैरूं बाबा मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यह स्थल लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। आने वाले दिनों में भी यहां भक्तों की भीड़ और बढ़ने की संभावना है।
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