बॉलीवुड: अभिनेता Arjun Kapoor ने जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपने बचपन, फिल्म इंडस्ट्री और सफलता को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने साफ कहा कि फिल्मी परिवार से आने के बावजूद सफलता कभी आसान नहीं होती, बल्कि आखिरकार दर्शक ही तय करते हैं कि कौन टिकेगा और कौन नहीं।
Arjun Kapoor ने अपने बचपन को याद करते हुए मजेदार किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि वह बचपन में बेहद शरारती थे, लेकिन हर बार पकड़े जाते थे।
उन्होंने हंसते हुए कहा, “मेरी आवाज बहुत तेज थी, मैं जल्दी लंबा भी हो गया था और लगभग 150 किलो का था। इसलिए शरारत करने के बाद भाग भी नहीं सकता था। दोस्त भी मुझे ही फंसा देते थे।”
यह किस्सा सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।
यह कार्यक्रम FICCI FLO जयपुर चैप्टर द्वारा Birla Auditorium में आयोजित ‘माइंडफुलनेस समिट विद चेंज ऑफ गार्ड’ के तहत हुआ था।
कार्यक्रम की अगुवाई चेयरपर्सन डॉ. रिम्मी शेखावत ने की। इस दौरान राजस्थान की उपमुख्यमंत्री Diya Kumari भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
Arjun Kapoor ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सबसे बड़े मिथक पर बात करते हुए कहा कि लोग अक्सर मानते हैं कि फिल्मी परिवार से आने वालों को सफलता आसानी से मिल जाती है।
उन्होंने कहा, “यह एक बड़ी गलतफहमी है। आपको मौका मिल सकता है, लेकिन टिके रहना और सफल होना पूरी तरह दर्शकों पर निर्भर करता है।”
अर्जुन कपूर ने बताया कि उन्होंने साल 2012 में फिल्म Ishaqzaade से अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय सोशल मीडिया का प्रभाव कम था और लोगों तक जानकारी सीमित रूप से पहुंचती थी।
लेकिन समय के साथ सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने फिल्म इंडस्ट्री को लेकर लोगों की धारणा को भी बदल दिया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म बनाना एक बेहद कठिन और जटिल प्रक्रिया है। इसमें कई लोगों की मेहनत और समर्पण शामिल होता है।
अर्जुन कपूर ने कहा, “लोगों को लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ ग्लैमर और मौज-मस्ती होती है, लेकिन सच्चाई यह है कि यहां भी उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है जितनी किसी और क्षेत्र में।”
सोशल मीडिया के प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल लोग कलाकारों को उनके सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर जज करने लगे हैं।
उन्होंने कहा, “लोग हमें एयरपोर्ट या जिम लुक में देखकर सोच लेते हैं कि यही हमारी जिंदगी है, लेकिन असल में फिल्म निर्माण एक लंबी और मेहनती प्रक्रिया है।”
अर्जुन कपूर ने अपने चाचा Anil Kapoor का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बचपन से ही देखा है कि घर पर एक सामान्य व्यक्ति और बाहर एक स्टार का जीवन कितना अलग होता है।
इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि एक अभिनेता के तौर पर लोगों का प्यार और पहचान मिलना कितना महत्वपूर्ण होता है।
अंत में उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री दुनिया के सबसे खूबसूरत पेशों में से एक है, क्योंकि इसमें कलाकार सीधे लाखों-करोड़ों लोगों से जुड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज जहां भी जाते हैं, लोग उन्हें पहचानते हैं और सराहते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
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