जयपुर: से चिकित्सा जगत में एक हैरान कर देने वाली और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां 106 साल की बुजुर्ग महिला की सफल सर्जरी कर डॉक्टरों ने एक नया उदाहरण पेश किया है। इतनी अधिक उम्र में ऑपरेशन करना जहां बेहद जोखिम भरा माना जाता है, वहीं इस महिला की सर्जरी न केवल सफल रही, बल्कि उनकी रिकवरी ने भी सभी को चौंका दिया।
यह सर्जरी जयपुर के प्रतिष्ठित Sawai Man Singh Hospital (SMS हॉस्पिटल) में की गई। महिला झुंझुनूं जिले की निवासी बनासरी थीं, जो पिछले कुछ समय से पेट में तेज दर्द से परेशान थीं। जांच में सामने आया कि उनकी पित्त की थैली (गॉल ब्लैडर) और उससे जुड़ी नली में पथरी फंसी हुई थी, जिससे लगातार दर्द और जटिलता बनी हुई थी।
जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर Dr. Amit Jain ने बताया कि 100 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज का ऑपरेशन करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होती है। इस उम्र में शरीर की सहनशक्ति कम हो जाती है और ऑपरेशन के दौरान ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और अन्य जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि इस केस में केवल उम्र ही चुनौती नहीं थी, बल्कि गॉल ब्लैडर के साथ-साथ उससे जुड़ी नली में भी पथरी फंसी हुई थी, जिससे ऑपरेशन और अधिक जटिल हो गया था।
डॉक्टरों की टीम ने 10 अप्रैल को करीब 2 घंटे तक चले ऑपरेशन में आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक (दूरबीन विधि) का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में पेट में छोटे-छोटे छेद कर गॉल ब्लैडर को निकाला गया और नली में फंसी पथरी को भी सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया गया।
इस तरह की सर्जरी आमतौर पर कम उम्र के मरीजों में भी सावधानी से की जाती है, लेकिन 106 साल की उम्र में इसे सफलतापूर्वक अंजाम देना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
ऑपरेशन के बाद महिला की रिकवरी ने डॉक्टरों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। सर्जरी के 12 घंटे बाद ही उन्हें हल्का भोजन दिया गया और उन्होंने धीरे-धीरे चलना-फिरना शुरू कर दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑपरेशन के महज 24 घंटे के भीतर महिला ने खुद को पूरी तरह बेहतर महसूस किया और डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी।
डॉ. अमित जैन ने बताया कि इससे पहले 103-104 साल की उम्र के मरीज का गॉल ब्लैडर ऑपरेशन किया जा चुका है, लेकिन 106 साल की उम्र में इस तरह की सर्जरी का मामला बेहद दुर्लभ है।
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में सर्जिकल टीम के साथ-साथ एनेस्थीसिया टीम का भी अहम योगदान रहा। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर इस ऑपरेशन को सफल बनाया, जो टीमवर्क और मेडिकल स्किल का बेहतरीन उदाहरण है।
यह मामला न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश के मेडिकल क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। इससे यह साबित होता है कि सही तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ उम्र भी इलाज में बाधा नहीं बनती।
जयपुर के SMS हॉस्पिटल में 106 साल की महिला की सफल सर्जरी ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाई है। यह घटना बताती है कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के दम पर असंभव लगने वाले काम भी संभव हो सकते हैं।
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