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CEC पर घमासान! विपक्ष फिर लाया हटाने का प्लान—200 सांसद जुटाने की रणनीति, क्या इस बार बदलेगा खेल?

देश: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संवैधानिक मुद्दा चर्चा में है। ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष ने नई रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, कई प्रमुख विपक्षी दल मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ नया नोटिस लाने की तैयारी में जुटे हैं।

पहले भी हो चुकी है कोशिश

यह पहला मौका नहीं है जब विपक्ष ने CEC को हटाने की पहल की हो। इससे पहले मार्च 2026 में भी विपक्ष ने संसद में नोटिस दिया था। हालांकि उस समय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

उनका कहना था कि CEC के खिलाफ लगाए गए आरोप इतने मजबूत नहीं हैं कि उन्हें हटाने जैसी संवैधानिक कार्रवाई शुरू की जा सके।

अब क्यों फिर सक्रिय हुआ विपक्ष?

विपक्ष के इस नए कदम के पीछे हाल ही में लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संशोधन बिल भी एक अहम कारण माना जा रहा है। विपक्ष मानता है कि इस मुद्दे के बाद राजनीतिक माहौल बदला है और अब अधिक सांसदों का समर्थन मिल सकता है।

इसी वजह से विपक्ष इस बार पहले से ज्यादा मजबूत तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहता है।

200 सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश

सूत्रों के अनुसार, विपक्ष इस बार कम से कम 200 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। हालांकि नियमों के मुताबिक:

  • लोकसभा में प्रस्ताव लाने के लिए 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं
  • राज्यसभा में यह संख्या 50 सांसदों की होती है

फिर भी विपक्ष ज्यादा समर्थन दिखाकर अपने प्रस्ताव को राजनीतिक और नैतिक मजबूती देना चाहता है।

कैसे हटाया जाता है मुख्य चुनाव आयुक्त?

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया बेहद कठिन और सख्त होती है। यह प्रक्रिया लगभग जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 के तहत सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी होती है।

इसमें:

  • संसद के किसी एक सदन में प्रस्ताव लाया जाता है
  • आवश्यक हस्ताक्षर पूरे होने पर प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है
  • इसके बाद एक जांच समिति गठित की जाती है
  • दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है

तभी जाकर CEC को पद से हटाया जा सकता है।

जांच समिति का गठन कब होता है?

यदि लोकसभा और राज्यसभा में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो दोनों सदनों के अध्यक्ष—लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन—मिलकर संयुक्त जांच समिति का गठन करते हैं। यह समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट देती है।

राजनीतिक संदेश भी अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। विपक्ष इस मुद्दे के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाना चाहता है।

वहीं सरकार और उसके समर्थक इसे राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

आगे क्या होगा?

अब नजर इस बात पर है कि विपक्ष कितने सांसदों का समर्थन जुटा पाता है और क्या इस बार नोटिस स्वीकार होता है या नहीं। यदि प्रस्ताव फिर से खारिज होता है, तो यह विपक्ष के लिए बड़ा झटका हो सकता है।


निष्कर्ष:

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और दुर्लभ है। विपक्ष की यह नई पहल भारतीय राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा कर सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और राजनीतिक गलियारों में गर्माया रहेगा।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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