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जयपुर के ‘परफॉर्मेंस कलेक्टर’ बने CM के सबसे भरोसेमंद अफसर: डॉ. जितेन्द्र सोनी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

राजस्थान: की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव सामने आया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी को मुख्यमंत्री सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि उस कार्यशैली और परिणामों की पहचान है, जिसने जयपुर जिले में सुशासन के नए मानक स्थापित किए।

डॉ. सोनी को लंबे समय से एक लो-प्रोफाइल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनकी छवि विवादों से दूर और जनता के बीच भरोसेमंद रही है। यही कारण है कि भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें अपने सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक तंत्र—मुख्यमंत्री कार्यालय—में अहम भूमिका सौंपी है।

जयपुर में प्रशासनिक मॉडल बने डॉ. सोनी

बतौर जयपुर जिला कलेक्टर, डॉ. सोनी ने प्रशासन को सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाया। उन्होंने सरकार की योजनाओं को तेज, पारदर्शी और परिणाम आधारित तरीके से लागू करने पर जोर दिया।

उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण ‘रास्ता खोलो अभियान’ रहा। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े रास्तों को खुलवाने के लिए शुरू किया गया था। महज 17 महीनों के भीतर 1800 से अधिक रास्तों को खोलना किसी बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि से कम नहीं है। इससे लाखों ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिली और उनकी आजीविका से जुड़ी समस्याएं भी काफी हद तक हल हुईं।

यह पहल इतनी प्रभावी रही कि इसे राज्य स्तर पर सराहा गया और अन्य जिलों में भी इसे लागू करने की चर्चा शुरू हो गई। इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान भी संभव है।

‘नरेगा आखर अभियान’: साक्षरता की नई क्रांति

डॉ. सोनी के कार्यकाल की दूसरी बड़ी उपलब्धि ‘नरेगा आखर अभियान’ रही। इस पहल का उद्देश्य मनरेगा श्रमिकों को साक्षर बनाना था। आमतौर पर श्रमिक वर्ग तक शिक्षा पहुंचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है, लेकिन इस अभियान ने इसे संभव कर दिखाया।

इस योजना के तहत 41 हजार से अधिक निरक्षर श्रमिकों ने साक्षरता परीक्षण पास किया। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है। इस अभियान ने श्रमिकों में आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

अभियान के अगले चरण में इन श्रमिकों को डिजिटल साक्षरता, बैंकिंग सिस्टम, यूपीआई, मोबाइल सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे वे न केवल पढ़-लिख सकेंगे, बल्कि डिजिटल भारत का हिस्सा भी बन पाएंगे।

‘सक्षम जयपुर अभियान’ से बदली तस्वीर

जयपुर में ‘सक्षम जयपुर अभियान’ भी डॉ. सोनी के नेतृत्व में एक बड़ी सफलता साबित हुआ। इस पहल का मकसद प्रशासन और आमजन के बीच संवाद को मजबूत करना था।

इस अभियान के जरिए नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुना गया और उनका त्वरित समाधान किया गया। इससे लोगों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आई। यह मॉडल सुशासन का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा।

खेल और युवाओं के लिए नई पहल

डॉ. सोनी ने केवल प्रशासनिक सुधार ही नहीं किए, बल्कि खेल और युवा प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहित किया। पंच गौरव योजना के तहत जयपुर में 1173 कबड्डी मैदान और 20 सिंथेटिक मैट तैयार किए गए।

इन मैदानों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को खेल के प्रति आकर्षित किया और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया। यह पहल खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में भी मददगार साबित हुई।

नारी सशक्तिकरण और जनभागीदारी पर जोर

डॉ. सोनी की कार्यशैली में महिला सशक्तिकरण को भी विशेष महत्व दिया गया। ‘नारी चौपाल’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए हजारों महिलाओं को अपनी समस्याएं रखने और समाधान पाने का अवसर मिला।

इसके अलावा, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पार्क गोद लेने की पहल ने भी जनभागीदारी को मजबूत किया। इन पार्कों में ओपन जिम, वॉकवे और अन्य सुविधाओं का विकास किया गया, जिससे आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया।

लो-प्रोफाइल लेकिन हाई-इम्पैक्ट अधिकारी

डॉ. सोनी की खासियत यह है कि वे प्रचार से दूर रहते हैं, लेकिन उनके काम खुद बोलते हैं। उनकी कार्यशैली में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और नवाचार का अनूठा संतुलन देखने को मिलता है।

वे हमेशा जमीनी स्तर पर काम करने में विश्वास रखते हैं और यही कारण है कि उनके नेतृत्व में किए गए कार्यों का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है।

अब मुख्यमंत्री सचिव के रूप में नई चुनौती

मुख्यमंत्री सचिव का पद प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह पद सरकार की नीतियों को लागू करने, फैसलों को तेजी से आगे बढ़ाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है।

डॉ. सोनी के अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस जिम्मेदारी को भी उसी दक्षता के साथ निभाएंगे, जैसे उन्होंने जयपुर में किया।

राज्य के लिए क्या होंगे मायने?

डॉ. सोनी की नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि सरकार अब परिणाम आधारित प्रशासन पर जोर दे रही है। उनके नेतृत्व में राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनकेंद्रित योजनाओं को और मजबूती मिलने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जयपुर मॉडल को राज्य स्तर पर लागू किया गया, तो यह राजस्थान के विकास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।


निष्कर्ष:

डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी की मुख्यमंत्री सचिव के रूप में नियुक्ति केवल एक पदोन्नति नहीं, बल्कि उनके उत्कृष्ट कार्यों की स्वाभाविक पहचान है। जयपुर में उनके द्वारा किए गए नवाचारों ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही रणनीति से प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है। अब राज्य की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे इस नई भूमिका में किस तरह सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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