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जयपुर सीवर हादसा: 2 कर्मचारियों की मौत पर एक्शन, 6 अफसरों की कमेटी—क्या छिपी है बड़ी लापरवाही?

राजस्थान: की राजधानी Jaipur में सीवर सफाई के दौरान दो सफाई कर्मचारियों की मौत के मामले ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झोटवाड़ा जोन में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद नगर निगम ने अब जांच के आदेश देते हुए 6 अधिकारियों की एक कमेटी गठित की है, जिसे 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

यह घटना 17 अप्रैल को झोटवाड़ा क्षेत्र के वार्ड 24 में हुई, जहां दो सफाई कर्मचारियों को सीवर चैम्बर की सफाई के लिए नीचे उतारा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही दोनों कर्मचारी सीवर में उतरे, वहां मौजूद जहरीली गैस के कारण उनका दम घुटने लगा और वे बेहोश होकर गिर पड़े।

बचाव के प्रयास, लेकिन नहीं बच सकी जान

घटना के तुरंत बाद अन्य कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। दोनों को इलाज के लिए Kanwatia Hospital ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की। सीपीआर समेत सभी जरूरी उपचार दिए गए, लेकिन अंततः दोनों की मौत हो गई।

इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण दिया जा रहा है या नहीं।

जांच के लिए बनी 6 सदस्यीय कमेटी

घटना के बाद नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी सहित कुल 6 वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि हादसे के पीछे किन परिस्थितियों और लापरवाहियों की भूमिका रही।

कमेटी में अतिरिक्त आयुक्त (द्वितीय) प्रवीण कुमार, उपायुक्त स्वास्थ्य ओम थानवी, उपायुक्त झोटवाड़ा मनीषा यादव, अधीक्षण अभियंता (सीवर) चरण सिंह मीणा, अधीक्षण अभियंता दिनेश चंद गुप्ता और अधिशाषी अभियंता (गैराज) गोपाल मूंड शामिल हैं।

यूनियन का विरोध प्रदर्शन

घटना के बाद सफाई कर्मचारी यूनियन ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों और उनके परिजनों ने Kanwatia Hospital के बाहर शव रखकर धरना दिया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कर्मचारियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतारा गया, जो कि पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। उन्होंने मृतकों के परिवारों को मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि सीवर सफाई जैसे खतरनाक कार्यों में कर्मचारियों को गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और सुरक्षा किट उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सिस्टम की गंभीर खामी को दर्शाती हैं।

भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर सफाई से जुड़े हादसे पहले भी कई बार सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि श्रमिक सुरक्षा के प्रति उदासीनता को भी उजागर करती है।

अब क्या होगा आगे?

नगर निगम द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है। यदि लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।


निष्कर्ष:

जयपुर का यह सीवर हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है। Jaipur में हुई इस घटना ने प्रशासन को एक बार फिर आईना दिखाया है कि बिना सुरक्षा उपायों के ऐसे काम करवाना जानलेवा साबित हो सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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