उत्तर प्रदेश: के कानपुर में एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां 24 वर्षीय प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना ने न केवल कानूनी जगत बल्कि पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है।
आत्महत्या से पहले प्रियांशु ने दो पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के दर्दनाक अनुभवों और मानसिक पीड़ा को विस्तार से बयान किया। उन्होंने अपनी आखिरी इच्छा जताते हुए लिखा कि “पापा मेरे शव को हाथ न लगाएं।”
सुसाइड नोट में उन्होंने अपने पिता राजेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि बचपन से ही उन्हें डांट, अपमान और कठोर व्यवहार का सामना करना पड़ा, जिसने उनके मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित किया।
प्रियांशु ने अपने नोट में बचपन की एक घटना का जिक्र किया, जब छह साल की उम्र में उन्होंने फ्रिज से मैंगोशेक पी लिया था। इस पर पिता ने उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था। यह घटना उनके मन में गहरी चोट बनकर रह गई।
उन्होंने लिखा कि पढ़ाई के नाम पर अत्यधिक दबाव, हर समय शक की नजर और छोटी-छोटी बातों पर अपमान ने उनकी जिंदगी को बोझ बना दिया था।
सुसाइड नोट के अनुसार, पिता अक्सर उन्हें लोगों के सामने बेइज्जत करते थे। कक्षा नौ में विषय चयन से लेकर कम अंक आने तक हर बात पर उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा।
उन्होंने यह भी लिखा कि हाईस्कूल के दौरान कम अंक आने पर वे घर छोड़कर मथुरा तक चले गए थे। बचपन की छोटी गलतियों को भी बार-बार सबके सामने दोहराकर उन्हें शर्मिंदा किया जाता था।
प्रियांशु ने अपने नोट में बताया कि उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद के लिए ट्यूशन पढ़ाई और ऑनलाइन काम किया। उन्होंने अपने पिता को मोबाइल और बहन को फोन व स्कूटी भी दिलाई।
इसके बावजूद पिता द्वारा उन पर लगातार शारीरिक कमजोरी और असफलता के आरोप लगाए जाते रहे। उन्होंने लिखा कि उनके जीवन में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप किया जाता था—कौन फोन करता है, कहां जा रहे हैं—हर बात पर सवाल उठाए जाते थे।
पुलिस के अनुसार, घटना से करीब तीन घंटे पहले प्रियांशु ने अपना सुसाइड नोट व्हाट्सएप स्टेटस पर भी शेयर किया था। इसमें उन्होंने आत्महत्या का संकेत दिया था।
गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे उन्होंने कोर्ट की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
अपने नोट में प्रियांशु ने मां और बहन के लिए प्यार व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने लिखा कि उनके पिता के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।
हालांकि, नोट में पिता के प्रति गहरी नाराजगी और दूरी साफ दिखाई देती है।
कानपुर कचहरी में एक साल के भीतर आत्महत्या की यह दूसरी घटना है। इससे पहले अक्टूबर में एक महिला स्टेनोग्राफर ने भी इसी तरह आत्महत्या की थी। लगातार ऐसी घटनाओं ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रियांशु श्रीवास्तव की आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि समाज में बढ़ते मानसिक दबाव और पारिवारिक तनाव की गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि भावनात्मक समर्थन और संवाद की कमी किसी भी व्यक्ति को कितना तोड़ सकती है। अब जरूरी है कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता से समझा जाए और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।
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