उत्तर प्रदेश: के मथुरा में चल रहा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद अब एक नए और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। इस बहुचर्चित मामले में अब प्राचीन मूर्तियों को अहम साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश करने की तैयारी हो रही है। इनमें भगवान विष्णु के विश्वरूप समेत कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं, जो समय-समय पर खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थीं।
यह मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे मजबूत करने के लिए नए-नए साक्ष्य पेश कर रहे हैं।
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। जन्मभूमि पक्ष का दावा है कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है, वही भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक जन्मस्थान है। वहीं मस्जिद पक्ष इस दावे को खारिज करता रहा है।
अब इस विवाद में पुरातात्विक साक्ष्यों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
जन्मभूमि पक्ष का कहना है कि खुदाई के दौरान मिलीं कई प्राचीन मूर्तियां इस बात का संकेत देती हैं कि यह क्षेत्र प्राचीन समय से ही हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। ये सभी मूर्तियां फिलहाल राजकीय संग्रहालय मथुरा में सुरक्षित रखी गई हैं।
इनमें भगवान विष्णु का विश्वरूप, भगवान कार्तिकेय, अग्निदेव, देवी गंगा जैसी मूर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मूर्तियां बौद्ध और जैन परंपरा से भी जुड़ी हुई हैं, जैसे भगवान बुद्ध और तीर्थंकर ऋषभनाथ से संबंधित अवशेष।
जन्मभूमि पक्ष का मानना है कि खासतौर पर विश्वरूप विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां यह साबित करने में मदद कर सकती हैं कि यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

इस मामले के वादी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने आरटीआई के माध्यम से संग्रहालय से इन मूर्तियों की पूरी जानकारी प्राप्त की है। संग्रहालय प्रशासन ने आधिकारिक रूप से सात मूर्तियों और एक स्तंभ की जानकारी उपलब्ध कराई है।
महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये सभी साक्ष्य अदालत में पेश किए जाएंगे और इससे उनके पक्ष को मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार, “ये मूर्तियां स्पष्ट संकेत देती हैं कि यह क्षेत्र भगवान कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं से जुड़ा रहा है।”
वहीं शाही ईदगाह मस्जिद पक्ष ने इन दावों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। मस्जिद के पैरोकार तनवीर अहमद का कहना है कि अदालत में जो भी साक्ष्य पेश किए जाएंगे, उनका विधिवत अध्ययन किया जाएगा और उसी आधार पर जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के साक्ष्य पहले भी पेश किए जा चुके हैं और अदालत सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही फैसला करेगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस समय वाद बिंदुओं को तय करने की प्रक्रिया चल रही है। जन्मभूमि पक्ष चाहता है कि अदालत पहले यह तय करे कि यह मामला आस्था से जुड़ा है, जबकि मस्जिद पक्ष का कहना है कि पहले यह साबित किया जाए कि यह वास्तव में आस्था का विषय है।
दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक साक्ष्य जुटा रहे हैं।
इस मामले में अब इन मूर्तियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर अदालत इन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार करती है, तो यह केस की दिशा बदल सकता है।
हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक और प्रस्तुत किए गए सभी तथ्यों के विश्लेषण पर निर्भर करेगा।
मथुरा का यह विवाद अब सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों की जंग बन गया है। विश्वरूप विष्णु और अन्य मूर्तियों का अदालत में पेश होना इस केस में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।
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