Download App Now Register Now

2.18 लाख की ‘धर्म सेना’ का ऐलान! शंकराचार्य बोले- पहले टोको, फिर रोको... नहीं माने तो ‘ठोको’

वाराणसी: में एक बड़ा और चर्चित ऐलान सामने आया है, जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को ‘चतुरंगिणी सेना’ के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि यह सेना धर्म, गाय, शास्त्र और मंदिरों की रक्षा के लिए काम करेगी। इस सेना में कुल 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक शामिल किए जाएंगे, जो देशभर से चुने जाएंगे।

शंकराचार्य ने बताया कि इस सेना का उद्देश्य किसी प्रकार की हिंसा नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक तरीकों से धर्म की रक्षा करना है। उन्होंने सेना की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए कहा—“पहले टोको, फिर रोको, और यदि तब भी बात न बने तो ‘ठोको’।” हालांकि उन्होंने ‘ठोको’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका मतलब शारीरिक हमला नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई, शिकायत और पंचायत के माध्यम से समाधान है।

कैसे बनेगी 2.18 लाख की सेना?

शंकराचार्य ने सेना की संरचना भी विस्तार से बताई। उनके अनुसार—

  • एक टीम (पत्ती) में 10 सदस्य होंगे
  • कुल 21,870 टीमें बनाई जाएंगी
  • देश के लगभग 800 जिलों में हर जिले से 27 टीमें बनाई जाएंगी

इस तरह कुल मिलाकर यह सेना 2 लाख से अधिक लोगों की होगी। इसके लिए उन्होंने ‘श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा’ का गठन भी किया है, जिसमें 27 सदस्य होंगे और स्वयं शंकराचार्य इसके अध्यक्ष रहेंगे।

ड्रेस और पहचान

इस सेना की एक अलग पहचान भी होगी—

  • सैनिक पीले वस्त्र पहनेंगे
  • उनके हाथ में परशु (फरसा) होगा

हालांकि यह प्रतीकात्मक बताया गया है, लेकिन इससे सेना की छवि और उद्देश्य को दर्शाने की कोशिश की गई है।

धार्मिक स्थलों पर बयान

इस दौरान शंकराचार्य ने धार्मिक स्थलों में प्रवेश को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जैसे मक्का-मदीना में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, वैसे ही हिंदू धर्मस्थलों में भी केवल आस्था रखने वाले लोगों को ही प्रवेश मिलना चाहिए।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब बद्रीनाथ-केदारनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों में प्रवेश को लेकर बहस जारी है।

ऐतिहासिक संदर्भ भी बताया

शंकराचार्य ने इस पहल को ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ते हुए बताया कि आदि शंकराचार्य ने 8वीं सदी में 13 अखाड़ों की स्थापना की थी। इन अखाड़ों का उद्देश्य भी धर्म और संस्कृति की रक्षा करना था। नागा साधुओं को शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दी जाती थी।

हालांकि, आजादी के बाद 1954 में बने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बाद इन अखाड़ों की कमान परिषद के पास चली गई, जिससे शंकराचार्यों की भूमिका सीमित हो गई।

विवादों की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में शंकराचार्य और अखाड़ा परिषद के बीच मतभेद भी सामने आए थे। प्रयागराज माघ मेले के दौरान संगम स्नान को लेकर विवाद हुआ, जिसमें किसी भी अखाड़े ने उनका समर्थन नहीं किया। इसके बाद से वे लगातार साधु समाज में “विकृति” की बात उठाते रहे हैं।

उन्होंने ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ यात्रा भी निकाली, लेकिन उसमें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। ऐसे में यह नई ‘चतुरंगिणी सेना’ उनकी रणनीति का अगला कदम मानी जा रही है।

क्या है बड़ा संदेश?

इस घोषणा को केवल धार्मिक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। जहां एक ओर समर्थक इसे धर्म और संस्कृति की रक्षा का प्रयास बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं।


निष्कर्ष:

वाराणसी से उठी ‘चतुरंगिणी सेना’ की यह घोषणा आने वाले समय में बड़े विमर्श का विषय बन सकती है। शंकराचार्य ने इसे पूरी तरह संवैधानिक और शांतिपूर्ण बताया है, लेकिन इसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। यह पहल धार्मिक पहचान, परंपरा और आधुनिक कानून के बीच संतुलन की एक नई चुनौती भी पेश करती है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: CM का विपक्ष पर बड़ा हमला, डोटासरा बोले- “दिल्ली की पर्ची पढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री!” | राम मंदिर में आज रचा जाएगा इतिहास! राष्ट्रपति करेंगी ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, 7000 मेहमान बनेंगे गवाह | गैस संकट पर सरकार की बड़ी सफाई: घबराहट में बढ़ी सिलेंडर बुकिंग, रोज 50 लाख डिलीवरी; पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी नहीं | भजनलाल शर्मा का आया एक फोन और सारा काम हो गया... | मुकेश मिश्रा बने इंडियन मीडिया काउंसिल के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष, रतीराम गुर्जर को मिली प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी | उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग विवाद: TMC बोली BJP ने विपक्षी सांसदों को ₹15-20 करोड़ में खरीदा; भाजपा ने कहा – I.N.D.I.A. गठबंधन में फूट | लाल किले से 'नए भारत' का आगाज: पीएम मोदी देंगे 12वां ऐतिहासिक भाषण, 5000 खास मेहमान बनेंगे गवाह | PM मोदी बोले: पुणे जैसा पटना और मुंबई जैसा मोतिहारी बनेगा, पहली नौकरी पर सरकार देगी ₹15 हजार | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ, एनटीपीसी निवेश से ऊर्जा क्षेत्र को भी मिलेगी रफ्तार: अमित शाह | राजस्थान में सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका: 50 हजार कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन, नई भर्तियों में 100% पद बढ़े |