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700 KM पैदल चलकर जयपुर पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने रोका रास्ता: ओरण बचाओ आंदोलन ने पकड़ा जोर

राजस्थान: में ओरण (पारंपरिक चारागाह और वन क्षेत्र) के संरक्षण को लेकर एक बड़ा जनआंदोलन सामने आया है। सैकड़ों प्रदर्शनकारी लगभग 700 किलोमीटर की पदयात्रा कर जयपुर पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

यह पदयात्रा जैसलमेर के प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर से शुरू हुई थी और इसका उद्देश्य राज्य सरकार का ध्यान ओरण भूमि, गोचर क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण की ओर आकर्षित करना था।

जयपुर में रोकी गई पदयात्रा

प्रदर्शनकारी जब जयपुर पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे, तो पुलिस ने उन्हें भवानी निकेतन के पास रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी देखने को मिली।

इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

आंदोलन में शामिल हुए विधायक भाटी

इस आंदोलन में बाड़मेर जिले के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।

भाटी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों से आए कई बुजुर्गों ने 1965 और 1971 के युद्ध में देश की सेवा की है, लेकिन आज उन्हें अपनी जमीन और पर्यावरण बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओरण भूमि के संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जमीनों का बड़ा हिस्सा अभी तक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, जिससे अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।

ओरण भूमि पर अतिक्रमण बड़ा मुद्दा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ओरण और गोचर भूमि पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा जमीनों पर कब्जा करने के आरोप लगाए गए हैं।

भाटी ने मांग की कि सरकार ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करे और इसके संरक्षण के लिए स्पष्ट नीति बनाए।

खेजड़ी संरक्षण और अधूरी घोषणाएं

आंदोलन के दौरान खेजड़ी पेड़ के संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर बिल लाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।

विश्नोई समाज सहित कई संगठनों ने इस मुद्दे पर पहले भी आवाज उठाई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कठिन परिस्थितियों में पूरी की पदयात्रा

पदयात्रियों ने बताया कि उन्होंने 21 जनवरी को यात्रा शुरू की थी और कड़ाके की ठंड से लेकर भीषण गर्मी तक नंगे पैर चलते हुए जयपुर पहुंचे हैं।

इस दौरान उन्होंने ‘जय जय जैसाण’ जैसे नारों के साथ लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

सरकार को दी चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण का व्यापक संदेश

यह आंदोलन केवल ओरण भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नदियों, नालों, तालाबों और जैव विविधता के संरक्षण की मांग भी शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओरण क्षेत्र पारंपरिक रूप से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।


निष्कर्ष:

जयपुर में ओरण बचाओ पदयात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण और पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर जनता अब जागरूक हो चुकी है। यदि सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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