राजधानी: Delhi में एक दिल दहला देने वाले दुष्कर्म मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी को 20 साल की कठोर सजा सुनाई है। यह फैसला Tis Hazari Courts स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया, जिसने साफ कहा कि इस तरह की बर्बरता में किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।
मामला साल 2023 का है, जब आरोपी ने एक महिला को उसके ही बच्चों के सामने चाकू की नोक पर डराकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। अदालत ने इस जघन्य अपराध को गंभीरता से लेते हुए आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश Priyanka Bhagat ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आरोपी की कम उम्र को किसी भी तरह की राहत का आधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आरोपी ने एक असहाय महिला को उसके बच्चों के सामने धमकाया और अपराध को अंजाम दिया, वह अत्यंत क्रूर और अमानवीय है।
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा देना जरूरी है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए और भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लग सके।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 10 अगस्त 2023 की रात के बाद की है। पीड़िता के पति ने शराब के नशे में झगड़ा कर उसे और उसके तीन छोटे बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया था। पूरी रात भटकने के बाद अगली सुबह करीब साढ़े चार बजे महिला एक चाय की दुकान पर बैठी थी।
इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और हाथ में चाकू लेकर महिला को जबरन अपने साथ चलने के लिए मजबूर करने लगा। जब महिला ने विरोध किया, तो उसने बच्चों की जान से मारने की धमकी दी। मां होने के नाते महिला अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूर हो गई और आरोपी के साथ चली गई।
गली में ले जाकर आरोपी ने महिला के साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान उसके दो नाबालिग साथी भी वहां पहुंच गए। अभियोजन के अनुसार, उनमें से एक ने भी पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया, जबकि दूसरा मौके पर मौजूद रहा।
स्थिति और भयावह तब हो गई जब आरोपी ने विरोध करने पर पीड़िता की बेटी के पेट पर चाकू रखकर उसे जान से मारने की धमकी दी। इस घटना ने न केवल महिला की अस्मिता को ठेस पहुंचाई, बल्कि उसके बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है और ऐसे मामलों में यह दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हो सकती है। कोर्ट ने माना कि पीड़िता ने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट और सुसंगत तरीके से बयान किया, जिसमें किसी तरह का विरोधाभास नहीं था।
इस मामले में Nabi Karim Police Station में केस दर्ज किया गया था और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया।
इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और न्याय प्रणाली की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के जघन्य अपराधों में दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त सजा से समाज में एक मजबूत संदेश जाता है और पीड़ितों को न्याय मिलने का भरोसा बढ़ता है।
दिल्ली कोर्ट का यह फैसला न केवल एक पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है। यह संदेश साफ है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी और किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
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