उत्तराखंड: बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (UBSE) ने आखिरकार 2026 के बहुप्रतीक्षित 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस बार भी नतीजों में एक बार फिर छात्राओं का दबदबा देखने को मिला है। जहां एक ओर पास प्रतिशत में कुल मिलाकर सुधार दर्ज किया गया है, वहीं दूसरी ओर लड़कियों और लड़कों के बीच का अंतर भी साफ तौर पर नजर आया है।
हाईस्कूल (कक्षा 10) के परिणाम में कुल पास प्रतिशत 82.10% दर्ज किया गया। इसमें लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 96.08% पास प्रतिशत हासिल किया, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 88.03% रहा। यानी यहां करीब 6.16% का अंतर देखने को मिला।
रामनगर के एमपी इंटर कॉलेज के छात्र अक्षत गोयल ने 500 में से 491 अंक प्राप्त कर प्रदेश में टॉप किया।
इंटरमीडिएट (कक्षा 12) के परिणाम में कुल पास प्रतिशत 85.11% रहा। यहां भी छात्राओं ने 88.08% पास प्रतिशत के साथ बाजी मारी, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 81.92% रहा। इस तरह 8.05% का अंतर लड़कियों के पक्ष में रहा।
इस बार 12वीं में गीतिका पंत और सुशीला मेहंदीरत्ता ने 490 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया।
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2026 में रिजल्ट में सुधार देखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राओं का बेहतर प्रदर्शन कई कारणों से संभव हो रहा है:
इसके अलावा, सरकारी योजनाओं और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी लड़कियों की सफलता में अहम भूमिका निभाई है।
छात्र अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर आसानी से देख सकते हैं:
रोल नंबर डालते ही छात्रों को उनका रिजल्ट स्क्रीन पर मिल जाएगा।
10वीं के परिणाम में:
यह दर्शाता है कि इस बार औसत प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है।
राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह परिणाम राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सुधार का संकेत है। उन्होंने छात्रों को आगे भी इसी तरह मेहनत जारी रखने की सलाह दी।
पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड बोर्ड में छात्राएं लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। 2022 से 2026 तक के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि हर साल लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों से अधिक रहा है।
यह ट्रेंड न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में देखने को मिल रहा है, जहां बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
UK Board Result 2026 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही हैं। हालांकि कुल परिणाम बेहतर रहा, लेकिन लड़कों और लड़कियों के बीच का अंतर शिक्षा प्रणाली के लिए एक सोचने का विषय भी है। आने वाले समय में इस गैप को कम करना एक बड़ी चुनौती होगी।
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