राजस्थान: में साइबर ठगों ने ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाते हुए सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना लिया है। बेरोजगार युवाओं और छोटे व्यापारियों को टारगेट करते हुए ठगों ने नामी-गिरामी कंपनियों की फ्रेंचाइजी, डीलरशिप और डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का झांसा दिया और महज दो महीनों में करीब 600 लोगों से 35 से 40 करोड़ रुपए तक ठग लिए।
यह ठगी इतनी सुनियोजित तरीके से की गई कि पढ़े-लिखे लोग भी इसके जाल में फंस गए। ठगों ने बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी वेबसाइट तैयार कीं और खुद को कंपनी का अधिकारी या रीजनल मैनेजर बताकर लोगों से संपर्क किया।
साइबर अपराधियों ने सबसे पहले उन लोगों को निशाना बनाया, जो अपना बिजनेस शुरू करना चाहते थे या फ्रेंचाइजी लेने के इच्छुक थे। इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें नामी ब्रांड्स की फ्रेंचाइजी ऑफर दिखाई गई।
जब पीड़ित इन वेबसाइट्स या दिए गए नंबरों पर संपर्क करते, तो ठग बेहद प्रोफेशनल तरीके से बातचीत करते। उन्हें मुनाफे का आकर्षक प्लान बताया जाता और विश्वास दिलाया जाता कि कम निवेश में बड़ा कारोबार शुरू किया जा सकता है।
इसके बाद सिक्योरिटी डिपॉजिट, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य चार्जेस के नाम पर 5 से 10 लाख रुपए तक की रकम जमा करवाई जाती। पैसे जमा होने के बाद ठग एक सप्ताह तक एग्रीमेंट, लोकेशन सर्वे और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का नाटक करते रहे।
लेकिन जैसे ही समय बीता, सभी संपर्क नंबर बंद हो गए और फर्जी वेबसाइट्स भी इंटरनेट से गायब कर दी गईं।
जांच में सामने आया है कि ठगों ने जिन खातों में पैसा जमा करवाया, वहां से तुरंत रकम को 10 से 15 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इससे ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना मुश्किल हो गया।
यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें कई बैंक खाते और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
1. कॉफी फ्रेंचाइजी के नाम पर 8 लाख की ठगी
मानसरोवर निवासी अमित शर्मा कैफे खोलना चाहते थे। उन्होंने इंटरनेट पर एक नामी कॉफी चेन की फ्रेंचाइजी के लिए सर्च किया। ठगों ने खुद को कंपनी का मैनेजर बताकर फर्जी एग्रीमेंट भेजा और 8 लाख रुपए जमा करवा लिए। तय तारीख पर कोई नहीं आया और नंबर बंद हो गया।
2. FMCG एजेंसी के नाम पर 5 लाख ठगे
वैशाली नगर की सुनीता देवी को फोन कर बताया गया कि उनके क्षेत्र के लिए एजेंसी खाली है। इंटरव्यू का नाटक किया गया और उन्हें अप्रूवल लेटर भेजा गया। 5 लाख रुपए जमा करवाने के बाद न माल आया, न संपर्क हुआ।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स डीलरशिप में 10 लाख का नुकसान
जोबनेर के विक्रम सिंह को बड़ी कंपनी की डीलरशिप का झांसा दिया गया। फर्जी लेटर ऑफ इंटेंट भेजकर 10 लाख रुपए जमा करवा लिए गए। बाद में सभी संपर्क बंद हो गए।
इस हाईटेक ठगी का शिकार सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों के लोग भी बने हैं। जयपुर के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी कई लोग इस जाल में फंस गए।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। साइबर सेल ने बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी फ्रेंचाइजी या डीलरशिप के लिए पैसा जमा करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और रजिस्ट्रेशन की पूरी जांच जरूर करें।
राजस्थान में सामने आया यह फ्रेंचाइजी स्कैम साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। आकर्षक ऑफर और बड़े मुनाफे के लालच में आकर लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल की जाए और किसी भी अनजान लिंक या कॉल पर भरोसा न किया जाए।
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