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राजसमंद इरिगेशन पाल वन्यजीव उद्यान की स्थिति चिंता का विषय

राजसमंद. कभी बच्चों की खिलखिलाहट, पर्यटकों की चहल-पहल और परिवारों की खुशियों का केंद्र रहा शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल इरिगेशन पाल अब बदहाली की दर्दनाक कहानी बयां कर रहा है। नगर परिषद की ओर से लाखों रुपए खर्च कर विकसित किया गया वन्यजीव उद्यान अब समाजकंटकों की शरारतों और देखरेख के अभाव का शिकार बन गया है। जिन रंग-बिरंगे वन्यजीवों की प्रतिमाएं बच्चों के आकर्षण का केंद्र थीं, आज वे स्वयं संरक्षण की गुहार लगाती नजर आ रही हैं।

करीब 7.35 लाख रुपए की लागत से लगाए गए फाइबर स्टेच्यू में हाथी, शेर, गोरिल्ला, बतख, मगरमच्छ सहित कुल 14 वन्यजीव प्रतिमाएं शामिल थीं। इनका उद्देश्य इरिगेशन पाल को पर्यटन और मनोरंजन की दृष्टि से आकर्षक बनाना था, लेकिन कुछ ही महीनों में अधिकांश प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

मगरमच्छ के केवल अवशेष दिखाई दे रहे हैं, बतख को उखाड़ फेंका गया। हाथी की पूंछ उखाड़ दी गई, शेर की पूंछ तोड़ दी गई और गोरिल्ला का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। बच्चों की प्रिय बतख को एक सजग कर्मचारी ने बाद में सुरक्षित रखने के लिए सुलभ शौचालय में रखवाया। इन दृश्यों को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के हौसले कितने बुलंद हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इरिगेशन पाल पर न तो पर्याप्त निगरानी की व्यवस्था है और न ही रात्रिकालीन सुरक्षा। ऐसे में असामाजिक तत्व आसानी से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सिंचाई विभाग और संबंधित एजेंसियों की उदासीनता के कारण यह पर्यटन स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है।

दिसंबर माह में इरिगेशन पाल के साथ-साथ कलक्ट्रेट के बाहर स्थित अमर जवान उद्यान में भी जिराफ, घोड़ा, जेब्रा और हिरण सहित कई फाइबर स्टेच्यू लगाए गए थे। वहां स्थापित प्रतिमाएं आज भी सुरक्षित और अच्छी स्थिति में हैं। इसके विपरीत इरिगेशन पाल पर लगी अधिकांश प्रतिमाएं टूट-फूट का शिकार हो चुकी हैं। यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इरिगेशन पाल की सुरक्षा और रखरखाव में गंभीर चूक हुई है।

विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके तहत पूरे क्षेत्र में 360 डिग्री सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, रात्रिकालीन चौकीदार और नियमित गश्त की व्यवस्था हो, क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं की तत्काल मरम्मत करवाई जाए तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यालयों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जानी चाहिए।

आज इरिगेशन पाल केवल टूटे हुए स्टेच्यू का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्तियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो यह खूबसूरत उद्यान आने वाली पीढ़ियों के लिए सिर्फ एक याद बनकर रह जाएगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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