राजस्थान के सरकारी महकमों में समय की पाबंदी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीकर जिला मुख्यालय पर सोमवार को प्रशासनिक सुधार विभाग की राज्य स्तरीय टीम ने अचानक औचक निरीक्षण किया। जयपुर से आई इस टीम ने सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक कलेक्ट्रेट सहित विभिन्न विभागीय कार्यालयों में छापेमारी कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गहन जांच की।
शासन उपसचिव एवं अतिरिक्त निदेशक सुनील कुमार शर्मा के नेतृत्व में पहुंची टीम जैसे ही कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल हुई, पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। कई कार्यालयों में कर्मचारी अनुपस्थित मिले और कुछ महत्वपूर्ण कक्ष बंद पाए गए, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
निरीक्षण के दौरान धोद उपखंड अधिकारी (SDM) और सहायक कलेक्टर (ADM) के कार्यालय भी बंद पाए गए, वहीं कुछ अन्य विभागों के कमरों पर ताले लगे मिले। जलदाय विभाग और अन्य शाखाओं में भी कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले, जिससे आम जनता से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
टीम ने कई कार्यालयों से उपस्थिति रजिस्टर जब्त किए और अनुपस्थित कर्मचारियों के रिकॉर्ड को चिन्हित किया। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में राजपत्रित और अराजपत्रित कर्मचारी अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित थे, जिससे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर उजागर हुआ।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुल स्वीकृत स्टाफ में से एक बड़ा प्रतिशत कर्मचारी अनुपस्थित पाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समयपालन को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। इस वजह से दूर-दराज से आने वाले आम नागरिकों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
इस औचक निरीक्षण को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था और टीम ने स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी पहले से नहीं दी थी। टीम के इस कदम को सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
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