अमेरिकी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने अमेरिका और चीन के संबंधों को “विश्व इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक” बताया और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को व्हाइट हाउस आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच संबंध केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन की रीढ़ बन चुके हैं। उनके इस बयान को दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजिंग में हुई बैठक के दौरान ट्रंप ने घोषणा की कि शी जिनपिंग आगामी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस का दौरा करेंगे। उन्होंने इसे “पारस्परिक आधिकारिक यात्रा” बताते हुए कहा कि वह और अमेरिका की जनता चीनी राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के स्वागत के लिए उत्साहित हैं।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका और चीन के बीच दशकों से चले आ रहे संबंध केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच भी गहरे जुड़े हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब दुनिया व्यापार, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है।
अपने भाषण में ट्रंप ने अमेरिका और चीन के ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की स्थापना के समय से ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और वैचारिक जुड़ाव रहा है।
उन्होंने अमेरिकी संस्थापक नेता बेंजामिन फ्रैंकलिन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने औपनिवेशिक समाचार पत्र में चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचार प्रकाशित किए थे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की इमारत पर आज भी प्राचीन चीनी विद्वानों की मूर्तियां मौजूद हैं, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक हैं।

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ऊर्जा संकट और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अहम चर्चा हुई।
बताया गया कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना जरूरी है। यह समुद्री मार्ग लंबे समय से अमेरिका-ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण चर्चा में रहा है।
चीनी अधिकारियों के मुताबिक, शी जिनपिंग ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी प्रकार के टैक्स या टोल लगाने का विरोध किया है।
बैठक में व्यापार और ऊर्जा सहयोग को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले। एक चीनी अधिकारी के अनुसार, चीन ने अमेरिका से अधिक मात्रा में तेल खरीदने में रुचि दिखाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन भविष्य में खाड़ी देशों के तेल पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और अमेरिका इसके लिए अहम विकल्प बन सकता है।
दोनों नेताओं के बीच अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने और व्यापारिक सहयोग मजबूत करने पर भी बातचीत हुई।
बैठक के दौरान फेंटानिल और उससे जुड़े रसायनों की सप्लाई रोकने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। अमेरिका लंबे समय से चीन पर फेंटानिल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की सप्लाई को लेकर चिंता जताता रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों ने इस दिशा में सहयोग बढ़ाने और अवैध नशीली दवाओं के नेटवर्क पर रोक लगाने पर सहमति जताई।
बीजिंग में हुई बैठकों के बाद ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत बेहद सकारात्मक और उत्पादक रही।
उन्होंने कहा, “आज हमारी चर्चा बहुत उपयोगी रही और यह दोनों देशों के हित में है कि भविष्य में भी ऐसे संवाद जारी रहें।”
ट्रंप ने इस मुलाकात को अमेरिका-चीन मित्रता और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में आने वाला हर बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर डालता है। ऐसे में ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात आने वाले समय में कई बड़े वैश्विक फैसलों की दिशा तय कर सकती है।
बीजिंग दौरे के दौरान डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण और अमेरिका-चीन संबंधों को “वैश्विक शक्ति संतुलन की रीढ़” बताना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हुई बातचीत आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकती है।
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