ब्यावर स्थित राजकीय अमृतकौर जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता अंजलि की अचानक तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे अजमेर रेफर कर दिया, लेकिन वार्ड से एम्बुलेंस तक ले जाने के लिए ट्रॉली समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों का आरोप है कि करीब आधे घंटे तक ट्रॉली का इंतजार करने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं हुई, जिसके चलते मजबूरी में वे प्रसूता को पलंग सहित उठाकर मदर चाइल्ड विंग के मुख्य गेट तक ले गए और वहां से एम्बुलेंस में अजमेर रवाना किया।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और अनदेखी का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई और नारेबाजी भी की। उनका कहना है कि कई बार स्टाफ को मरीज की हालत के बारे में अवगत कराने के बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई।
मामले पर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा देवड़ा ने कहा कि सिजेरियन के बाद जच्चा-बच्चा ठीक थे, बाद में तबीयत बिगड़ने पर मरीज को रेफर किया गया। ट्रॉली न मिलने की जानकारी उन्हें नहीं है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब प्रदेश के कई अस्पतालों में सुधार के दावे किए जा रहे हैं।
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