राजस्थान: के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma एक बार फिर अपनी अलग कार्यशैली और प्रतीकात्मक संदेश को लेकर चर्चा में हैं। जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से पहुंचे। मुख्यमंत्री का इस तरह कार्यक्रम में पहुंचना पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बन गया।
इस कदम को सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि ग्रीन एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है। खास बात यह भी रही कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी काफिले में शामिल वाहनों की संख्या भी कम कर दी थी। अब EV में पहुंचकर उन्होंने साफ संकेत दिया है कि सरकार स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहती है।
जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव के दौरान जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, लोगों की नजरें उनकी इलेक्ट्रिक कार पर टिक गईं। राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक इस पहल की चर्चा शुरू हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह कदम प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा संदेश देता है। सरकार यह दिखाना चाहती है कि भविष्य पारंपरिक ईंधन का नहीं बल्कि स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा का है।
राजस्थान सरकार पिछले कुछ समय से ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर लगातार फोकस कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कई सार्वजनिक मंचों से यह बात दोहरा चुके हैं कि राजस्थान आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
सरकार का मानना है कि राजस्थान के पास सौर ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य में सालभर तेज धूप रहने के कारण बड़े स्तर पर सोलर प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं।
जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में भी ग्रीन एनर्जी निवेश, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इससे पहले भी अपने फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने सरकारी काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला लिया था।
सरकार का तर्क था कि इससे आम लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी, सरकारी खर्चों में कटौती होगी और ईंधन की बचत भी संभव होगी।
अब EV में कार्यक्रम स्थल पहुंचकर मुख्यमंत्री ने इस सोच को और मजबूत किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश भी है।
राजस्थान पहले से ही देश के सबसे बड़े सोलर एनर्जी उत्पादक राज्यों में शामिल है। जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और बाड़मेर समेत कई जिलों में बड़े स्तर पर सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा राज्य सरकार रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है। एनर्जी कॉन्क्लेव में कई निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में राजस्थान को ग्रीन एनर्जी कैपिटल के रूप में स्थापित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था का बड़ा हिस्सा बनने जा रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकारें अब इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां बना रही हैं।
राजस्थान सरकार भी EV चार्जिंग स्टेशन, इलेक्ट्रिक बस और ई-मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री का EV में पहुंचना इसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री की इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे प्रतीकात्मक राजनीति करार दिया।
हालांकि, आम लोगों के बीच यह चर्चा जरूर तेज हो गई कि अगर सरकार खुद इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाएगी तो इसका असर जनता पर भी पड़ेगा।
जयपुर एनर्जी कॉन्क्लेव में EV से पहुंचकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। काफिला कम करने के बाद अब इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल यह दिखाता है कि राजस्थान सरकार स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है।
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