भरतपुर जिले के नदबई उपखंड क्षेत्र के गांव बैलारा की रहने वाली ओमवती आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और प्रेरणा का बड़ा उदाहरण बन चुकी हैं। एक समय ऐसा था जब वर्ष 2002 में उनका परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था और दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया था। लेकिन हालातों से हार मानने के बजाय ओमवती ने अपने जीवन को बदलने का निर्णय लिया और यहीं से उनकी सफलता की कहानी की शुरुआत हुई।
इसी दौरान उनकी मुलाकात ‘समृद्ध भारत अभियान’ के निदेशक सीताराम गुप्ता से हुई, जिन्होंने उन्हें तुलसी माला बनाने का प्रशिक्षण दिया। साथ ही शुरुआती स्तर पर मशीन, औजार और कच्चा माल उपलब्ध कराकर आर्थिक सहायता भी दी। शुरू में संसाधनों की कमी और अनुभव न होने के कारण कई कठिनाइयाँ आईं, लेकिन ओमवती ने हिम्मत नहीं हारी। उनके बेटे मोनू शर्मा ने भी इस काम में उनका पूरा साथ दिया और धीरे-धीरे यह छोटा प्रयास एक सफल व्यवसाय में बदल गया।
समय के साथ उनके परिवार ने इस काम को और आगे बढ़ाया। उनके पति ने तुलसी माला बनाने वाली मशीनों को खुद तैयार करना सीखा और वर्ष 2004 से उन्होंने मशीन निर्माण और सप्लाई का काम शुरू कर दिया। आज उनका परिवार देश के कई राज्यों में हजारों मशीनें सप्लाई कर चुका है, जिससे उनका कारोबार एक बड़े स्तर पर पहुंच गया है।
वर्तमान में ओमवती तुलसी माला के व्यवसाय से हर महीने लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा। उनके साथ काम करने वाली कई ग्रामीण महिलाएं भी हर महीने 10 से 12 हजार रुपये तक कमा रही हैं, जबकि कुछ महिलाओं को 5 से 8 हजार रुपये तक का नियमित वेतन भी मिल रहा है। गांव की महिलाएं अपने घर के कामों के साथ-साथ रोजाना 4 से 5 घंटे काम करके आत्मनिर्भर बन रही हैं।
ओमवती का यह प्रयास अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों तक फैल चुका है। वे इन राज्यों में भी महिलाओं को तुलसी माला बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रही हैं, जिससे सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
तुलसी माला बनाने की प्रक्रिया के लिए कच्चा माल उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के जैत गांव से मंगवाया जाता है। एक किलो तुलसी लकड़ी से लगभग 20 भजन माला और 30 से 80 तक गले में पहनने वाली छोटी मालाएं तैयार की जाती हैं। कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक सफल कुटीर उद्योग साबित हो रहा है।
ओमवती की इस सफलता की कहानी ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है। आज वह न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि गांव की महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बन चुकी हैं। वे आगे भी अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का सपना देख रही हैं, ताकि कोई भी महिला आर्थिक तंगी के कारण पीछे न रह जाए।
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