राजस्थान केवल किलों और महलों का प्रदेश नहीं है, बल्कि यहां का हर जिला अपनी अनूठी पहचान, संस्कृति, विरासत और प्राकृतिक विशेषताओं के लिए जाना जाता है। प्रदेश के 41 जिलों में कहीं ऐतिहासिक दुर्ग और महल हैं तो कहीं धार्मिक आस्था के बड़े केंद्र, और कहीं उद्योग, हस्तशिल्प तथा लोककला की समृद्ध परंपरा देखने को मिलती है।
जयपुर को गुलाबी शहर कहा जाता है, जो आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस, जंतर-मंतर और जलमहल जैसे विश्व प्रसिद्ध धरोहरों के लिए जाना जाता है। जोधपुर को ब्लू सिटी कहा जाता है, जहां मेहरानगढ़ किला और उम्मेद भवन पैलेस प्रमुख आकर्षण हैं। बीकानेर अपने जूनागढ़ किले और बीकानेरी भुजिया के लिए प्रसिद्ध है, जबकि उदयपुर झीलों की नगरी के रूप में विश्वभर में लोकप्रिय है।
अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह और पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। श्रीगंगानगर को राजस्थान का अन्न भंडार कहा जाता है, वहीं कोटा शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है। बूंदी अपनी बावड़ियों और चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है, जबकि भरतपुर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के कारण पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग माना जाता है।
अलवर सरिस्का और भानगढ़ किले के लिए, धौलपुर लाल पत्थर की विशेषता के लिए, करौली कैलादेवी मंदिर के लिए और झालावाड़ गागरोन किले व संतरे की खेती के लिए प्रसिद्ध है। चित्तौड़गढ़ अपने विशाल किले और वीरता की कहानियों के लिए जाना जाता है, जबकि जालोर ग्रेनाइट उत्पादन का बड़ा केंद्र है।
माउंट आबू, नागौर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बारां, राजसमंद, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर, पाली, जैसलमेर, बाड़मेर, डीग, बालोतरा, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, फलोदी, सलूंबर, चूरू, दौसा और हनुमानगढ़ जैसे जिले भी अपनी अलग पहचान रखते हैं—कहीं धार्मिक महत्व, कहीं प्राकृतिक सुंदरता, तो कहीं औद्योगिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण।
कुल मिलाकर राजस्थान के सभी जिले मिलकर राज्य को एक समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान देते हैं, जो इसे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में विशिष्ट बनाती है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.